रातू से करीबन 8 किलोमीटर दूर ठाकुरगांव में स्थित है ये प्राचीनतम शक्तिपीठ मंदिर, जो रातू महाराजा के लाल साहब (शाहदेव फैमिली) के संरक्षण में है।

मंदिर के पुरोहित श्री अरविंद वैद्य के मुताबिक मंदिर के अंदर प्रवेश कर देवी के दर्शन की अनुमति सिर्फ परिवार के ही लोगों को है, इसके बावजूद यहां भक्तों की कतार लगी रहती है।

शक्ति पीठ ये मंदिर शायद उन चंद मंदिरों में से एक है जहां अगरबत्ती जलाना मना है। मंगलवार और शनिवार को मंदिर में भक्तों की भीड़ लगती है, लोग मन्नत पूरी होने पर खस्सी की बाली भी चढ़ाने यहां आते हैं।

मन्नत के लिए पान के पत्ते को लाल कपड़े में लपेट कर लोग देवी को अर्जित करते हैं ….और फिर उसे अपने घर के मंदिर में रखते है, मन्नत पूरी होने पर वापस देवी मां को अर्जित कर दिया जाता है।

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