देवघर में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। लाखों की लागत से बना स्वास्थ्य उपकेन्द्र विभाग की उदासीनता के कारण खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग इससे बेखबर है। अब इसकी जांच की मांग की जाने लगी है। ग्रामीणों के लिए लकड़ी और जलावन के भंडारण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा यह भवन दरअसल देवीपुर प्रखंड का धोबवा स्वास्थ्य उपकेंद्र है। कुछ वर्ष पहले ही लाखोँ की लागत से इसका निर्माण कराया गया है। लेकिन ग्रामीणों की माने तो निर्माण के बाद आजतक न तो कोई चिकित्सक यहां पहुंचा और न ही कोई स्वास्थ्य कर्मी
इस स्वास्थ्य उपकेंद्र में ड्रेसिंग रूम से लेकर ऑपरेशन थिएटर और मरीजों को एडमिट करने से लेकर सारी सुविधाएं उपलब्ध करा दी गईं हैं। लेकिन वास्तव में इसका स्वास्थ्य सेवा देने के लिए कोई इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। विभाग की इस लापरवाही से ग्रामीणों में काफी नाराजगी है


तेज़ी से खंडहर में तब्दील हो रहे हाल ही निर्मित इस स्वास्थ्य उपकेंद्र की जानकारी जब सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार को उपलब्ध कराई गई तब उन्होंने इसकी जांच कर उचित कदम उठाने की बात की बात कही। उन्होंने कहा कि हमें देखना है कि यह बिल्डिंग हैंडओवर हुआ या नहीं। हमारे कार्यालय के लोग बता रहे हैं कि बिल्डिंग हैंडओवर नहीं हुआ है

फिर उन्होंने कहा कि मैं अपने स्तर से जांच करूंगा और इस संदर्भ में भवन निर्माण को भी लिखुंगा। सारी जानकारी उपायुक्त महोदय को भी दूंगा। सरकार से पुन: आग्रह करूंगा कि जब सरकार अस्पताल बनाती है तब कम से कम एक डॉक्टर वहां पर पद स्थापित करे। फिर सीएस ने कहा कि मैं दो महीने पहले ही देवघर आया हूं। इस स्वास्थ्य केंद्र के बारे में मुझे पूरी जानकारी लेनी है

झारखंड की लचर स्वास्थ्य सेवा हमेशा से सवालों के घेरे में रहा है। इसके लिए कभी आधारभूत संरचना तो कभी चिकित्सकों की कमी बता कर विभाग अपना पल्ला झाड़ता रहा है। लेकिन इसका खामियाजा सीधे तौर पर ऐसे मरीजों को उठाना पड़ता है जो इलाज़ के लिए पूरी तरह से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर आश्रित हैं

AMRITA SINGH

In-House Reporter, Info India TV

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