आज तक अपने कुम्हड़ा की सब्जी खाई होगी। उसे कभी घर में सज़ा कर नहीं रखा होगा लेकिन झारखण्ड (देवघर ) के रहने वाले कलाकार ने कुम्हड़ा को ऐसा आकार दिया जिसे आप घर की शोभा बढ़ा सकते हैं। इसे पूतरू कृति ( putri kriti) कहते हैं।

मार्कण्डेय जज्वरे दो से ज्यादा साल पुराने कुम्हड़ा के छाल को केमिकल की मदद से बनाते हैं। ताकि वह कड़े हो जाएं और उसे मनचाही आकृति दिया जाएं।

साथ ही ये पेड़ों के जड़ से भी शिल्पकारी करते हैं।

इनकी पेंटिंग में भी एक अलग पहचान होती है। ऐसा लगता है कि पेड़ के छाल पर बनाईं गई है।
Manisha Priyadarshni
In-House Reporter,
Info Indian TV

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