झारखंड और आस पास के राज्यों में पाए जाने वाले असुर जनजाति खुद को महिषासुर के वंसज मानते हैं। दशहरा जैसे पर्व में यह लोग अपने आराध्य देव महिषासुर के वध का शोक मानते हैं।

असुर जनजाति के लोगो को सिर्फ उनकी आस्था के कारण काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। इन्हें हेय दृष्टि से देखा जाता है और इनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। इन्हें समाज से बाहर रखा जाता है, पानी शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधा से भी इन्हें वंचित रहना पड़ता है। इनपे हमले होना भी एक आम खबर है।

लोहा गलाने और बनाने के परंपरागत काम खत्म हो जाने के कारण इनका रोजगार भी छिन गया है। जिसके कारण इन्हें शहर की ओर पलायन करना पड़ रहा है। शहरों में भी इनके साथ दुर्व्यवहार जारी रहता है। गरीबी के कारण असुर लड़कियों की तस्करी भी काफी होती है।

दुनिया कितनी आगे निकल गयी है, फिर भी लोग आज भी धर्म और आस्था के नाम पे समाज को बांटने का काम करते हैं। सिर्फ एक बार खुद को इन असुर जनजाति के लोगों की जगह रख कर सोचिये, यदि आस्था के नाम पर आपके साथ ऐसा दुर्व्यवहार होता तो आप पर क्या बीतती?

Unnat Kumar Singh,
In-House Reporter, Info India TV

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