टैराकोटा यानी ” पक्की मिट्टी ” एक सेरामिक है जिसे पाउडर गिलास , कुचली मिट्टी के बर्तनों , सिलिका , स्फटयातु जारेय ( alumina) , मैग्नीशिया इत्यादि से मिलकर बनाया जाता है। परंतु झारखण्ड में टैराकोटा शिल्पकारी के बढ़ने का कारण है यहां कि मिट्टी जिसे जलाने के बाद सुनहरे लाल रंग की हो जाती हैं।

टैराकोटा शिल्पकारी से घर के सजावट के सामान, मूर्ति, जेवर तथा बर्तन बनाएं जातें हैं। टैराकोटा के बर्तन काफी सुंदर होते है साथ ही ये लीड मुक्त होते है और इसमें हानी कारक रंग का प्रयोग नहीं किया जाता।
बुंडू में स्थित ” आधार महिला समिति ” टैराकोटा शिल्पकारी सिखातें है और इसे बढ़ावा दे रहे हैं।

टैराकोटा शिल्पकारी का एक नायाब तोहफा है ” टैराकोटा मंदिर ” जो कि स्थिति है दुमका जिले के शिकारीपाड़ा के समीप मलूटी गांव में। जिसे 15वे शताब्दी में बसंत राजा के काल में बनाया गया था। मंदिर की शिल्पकला रामायण तथा अनेक ग्रंथों की कहानी दिखाई देती है।

source : you tube & Jharcraft

Manisha Priyadarshni

In-House Reporter, Info India TV

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