झारखंड में करीब 18 हजार शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। झारखंड हाईकोर्ट ने एकलपीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसके तहत नियुक्ति प्रक्रिया को गलत बताते हुए विज्ञापन को रद कर दिया गया था।

एकलपीठ के आदेश के खिलाफ सरकार ने खंडपीठ में अपील याचिका दायर की थी। सोमवार को इस पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक चीफ जस्टिस डीन पटेल और जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की अदालत ने एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी और कहा कि सरकार चाहे तो नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर सकती है। सरकार के लिए भी यह राहतभरा फैसला है। इसकी अगली सुनवाई अगले साल मार्च में निर्धारित की गई है। याचिका में विषय कंबिनेशन को दी गई थी चुनौती सरकार की ओर से कहा गया कि कुछ लोगों ने विषय के कंबिनेशन पर सवाल उठाया है और कहा है कि सरकार का यह कंबिनेशन उचित नहीं है। राज्य के हाई स्कूलों में इतिहास तथा नागरिक शास्त्र विषय के शिक्षक के लिए एक ही पद स्वीकृत है। इसी तरह, भौतिकी व गणित तथा रसायन शास्त्र व जीव विज्ञान विषय के लिए एक ही शिक्षक होते हैं। इस कारण इन संयुक्त विषयों के लिए शिक्षकों की नियुक्ति में दोनों विषयों में स्नातक उत्तीर्ण होने की योग्यता रखी गई है। जबकि प्रतिवादियों का कहना था कि विषयों का यह कंबिनेशन सही नहीं है। इससे कई उम्मीदवार नियुक्ति से वंचित रह सकते हैं।

45% अनिवार्य :

हाई स्कूल शिक्षक नियुक्ति नियमावली में इन संयुक्त विषयों में दोनों विषयों में न्यूनतम 45 फीसदी (अनुसूचित जाति व जनजाति 40 फीसदी) अंक के साथ स्नातक उत्तीर्ण होने की पात्रता निर्धारित की गई थी। नियुक्ति प्रक्रिया शुरू भी हुई, लेकिन उम्मीदवारों के विरोध के बाद दोनों में से किसी एकविषय में ही उक्त अंक लाना अनिवार्य किया गया। दोनों में स्नातक उत्तीर्ण का प्रावधानलागू रखा गया। इसे चुनौती दी गई थी।

छात्रों की मांगें :

झारखंड में शिक्षक भर्ती प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करनेवाली छात्र-छात्रओं ने दो प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया है। वह विषय की बाध्यता को समाप्त करने पर पूरी तरह से अड़े हैं। हालांकि, वे अपनी दूसरी मांग राज्य के 11 और 13 जिलो में अलग-अलग आरक्षण की व्यवस्था पर समझौता करने को तैयार थे। परंतु उनका कहना था कि विषय की बाध्यता को समाप्त किए बगैर परीक्षा का आयोजन नहीं होने देंगे।

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