झारखंड की जीवनरेखा कही जाने वाली स्वर्णरेखा आज शहर के कचरों के बोझ से कराह रही है, जनता हो या सरकार इसे डस्टबिन के अलावे कुछ नही समझती… करोड़ों रुपये खर्च कर सीवरेज सिस्टम सरकार बनाती है, लेकिन पूरे शहर के नाली का पानी सीधे जाकर स्वर्णरेखा में मिल रही है…स्वर्णरेखा नदी बचाने का जिम्मा उठाया एक ज़िद्दी पत्रकार सुधीर शर्मा जी ने…इसके लिए आज वे और उनके स्वर्णरेखा बचाओ अभियान के सहयोगियों ने रानीचुआं से इक्कीसो महादेव तक की काँवर यात्रा शुरू हो कर दी है… स्वर्णरेखा के पवित्र उद्गम “रानीचुआं” का जल लेकर वे महादेव की ओर बढ़ रहे है… इस अभियान में उन्हें काफ़ी लोगों का सहयोग मिल रहा है… लोग अभियान की जानकारी ले रहे है, सहयोग भी करने के इच्छुक है…
सुधीर शर्मा जी ने बताया कि इसी स्वर्णरेखा और उसकी सहायक नदी हरमू के संगम के चट्टानों पर स्थित 15वीं शताब्दी के इक्कीस शिवलिंग, जो संरक्षण के अभाव और सरकारी उदासीनता के कारण मिटने के कगार पर हैं…चट्टानों पर ऊंकेरे गए ये नागवंशी कालीन विरासत पर ना सरकार की नज़र पड़ी और ना ही इसके संरक्षण की दिशा में कोई कदम उठाए गए…सावन के महीने में भी ये इक्कीसो महादेव आपके जलाभिषेक का इंतज़ार कर रहे है… इन्हीं संदेशों को लोगों तक पहुंचाने और लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से मैं और मेरे कुछ साथी स्वर्णरेखा के उद्गम स्थल “रानीचुआं” से इक्कीसो महादेव तक की 31 जुलाई, सोमवार को पैदल काँवर यात्रा कर रहे है…

Advertisements