सैकड़ों सालों से सोना उगल रही इस नदी का लोग अपने रोजी रोटी के लिए करते है इस्तेमाल…पर इस सोना उगलती नदी का क्यों हुआ इतना बुरा हाल?…क्यों नहीं पड़ रही थी सरकार की इसपर नज़र…झारखण्ड स्तिथ स्वर्णरेखा नदी में लगा था गंदगी और प्रदूषित वस्तुओं का अंबार…प्लास्टिक और जलकुंभियों के अंबार से कैसे मिला इसे छुटकारा…कहानी कुछ यूँ 4 – 5  महीनें पुरानी है… सुधीर शर्मा नामक एक जर्नलिस्ट ने ठानी थी अकेले इस नदी को साफ़ करने की ज़िद…यह ज़िद ऐसी की लोग जुड़ते गए और और आज यह स्वर्णरेखा का दृश्य कुछ यूँ है…

 

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