आदिवासी महिलाएं जनी शिकार नामक पर्व मनाती हैं। यह 12 साल में एक बार मनाया जाता है।

– इस पर्व में महिलाएं लाठी-भाला समेत अन्य पारंपरिक हथियारों से लैस होकर शिकार करने निकलती हैं।

– आसपास के इलाकों और जंगलों में ये जानवरों का दिनभर शिकार करती हैं।

– रात में इन्हीं जानवरों को पकाकर खाती हैं और जश्न मनाया जाता है। इसी पर्व के लिए ये राहगीरों से चंदे के रूप में पैसे लेती हैं।

– इस शिकार में शामिल महिलाओं ने दावा किया कि उन्हें ऐसा करने की छूट राज्य सरकार ने दे रखी है। इसलिए उन्हें किसी का डर नहीं है।

– महिलाओं ने बताया कि इस दौरान वे लोगों से जानवर लेती भी हैं। महिलाओं के अनुसार लगभग चार से पांच हजार लोग इस पारंपरिक पर्व में शामिल हैं। ये सभी रांची और आसपास के इलाकों से हैं।

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